करवा चौथ










करवा चौथ का दिन हर महिला के लिए बहुत ही खास दिन होता है यह दिन हर महिला अपने पति की लंबी उम्र के लिए दिनभर निराहार उपवास रखती है वैसे तो नव विवाहित मैं लड़कियां भी उपवास रखती हैं लेकिन इस उपवास का सही महत्व शादी के बाद ही होता है जब वह अपने पति के लिए पहली बार उपवास रखती है तब करवा चौथ का महत्व और भी ज्यादा होता है

करवा चौथ का व्रत कब और कैसे रखा जाता है?
करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के शुभ दिवस रखा जाता है इस दिन प्रत्येक सुहागिन महिलाएं अपनी पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं
करवा चौथ के दिन सभी महिलाएं रात भर तक उपवास रखती है इस दिन वह निराहार और निर्जल उपवास करती हैं और जब रात में चंद्रमा निकलता है तो उसे छनी से देख कर और फिर अपने पति को देखकर के जल ग्रहण करती है

महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना
यह पहला करवा चौथ का व्रत है करवा चौथ का व्रत जितना कठिन होता है उतना ही इसमें सावधानी बरतनी पड़ती है ,

सुबह सभी बड़े लोगों का आशीर्वाद लें और फिर करें शुरू
करवा चौथ में हर महिला को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर और अपने परिवार वालों का सभी का आशीर्वाद लेकर इस व्रत को चालू करना चाहिए
ऐसा करने से आपके परिवार में विकास सौभाग्य तथा समृद्धि बनी रहती है

दोपहर मैं करें यह काम ?
जब आप करवा चौथ का व्रत रखती हैं तब आप को दोपहर में सोना नहीं चाहिए इस बात का को ध्यान रखना चाहिए
बल्कि दोपहर में हर महिला को जिन्होंने करवा चौथ का व्रत रखा है उन्हें अपने परिवार के साथ मिलकर करवा माता के गीत गाना चाहिए और अपने परिवार के साथ रहना चाहिए

इन सब वस्तुओं को इस्तेमाल ना करें
इस व्रत के दिन आपको धारदार चाकू केजी या सुई से बचना चाहिए इन सब वस्तुओं का आपको इस दिन उपयोग नहीं करना चाहिए

नवविवाहित को करवा चौथ में मायके और ससुराल से उपहार
नवविवाहित बहू की सास भी अपनी बहू के साथ व्रत की तैयारियों में प्रातः सरगी के साथ से ही जुट जाती है सासू मां अपनी बहू को कुछ विशेष महत्वपूर्ण उपहार भी देती है जैसे कि नए वस्त्र जोड़ा तथा गहने किंतु कई स्थान पर नव विवाहिता के पहले करवा चौथ पर बहू के मायके से श्रृंगार का सामान तथा अन्य उपहार देने की परंपरा है जिसे पहनकर नवविवाहिता संध्या की पूजा करती है

बाया क्या होता है
इसके अलावा संध्या के समय चौथ माता की पूजा प्रारंभ होने से पूर्व माताएं अपनी बेटी के ससुराल में कुछ मिठाईयां उपहार तथा फल भेजती है जिसे बाया कहा जाता है

सरगी क्या होता है?
करवा चौथ में सरगी का भी अपना एक विशेष महत्व होता है सरगी कि वह होती है जिसमें बादाम तथा अन्य मेवों के साथ सुहाग की निशानी होती है
पूजा प्रारंभ करने से पहले सास अपनी बहू को मिठाइयां तथा नए वस्त्र एवं श्रृंगार का सामान भी देती है,

सरगी के रूप में यह सांस का अपनी बहू को आशीर्वाद माना जाता है करवा चौथ की शुभ दिवस सूर्योदय होने से पूर्व लगभग 4:00 बजे के आसपास महिलाएं इस सरगी को खाकर व्रत का श्रीगणेश करती है

चंद्रमा उदित होने पर ही अपना व्रत खोलना चाहिए

करवा चौथ के दिन क्या पहनना चाहिए
करवा चौथ के दिन नवविवाहिता सर्वाधिक महत्वपूर्ण तथा आकर्षक दिखाई देना चाहती है इनका पहला करवाचौथ होता है दुल्हन की तरह तैयार होती हैं जिसमें लाल रंग का जोड़ा शगुन के तौर पर माना जाता है करवा चौथ का व्रत महिलाओं के वैवाहिक जीवन से जुड़ा होता है हो सके तो इस दिवस पूजा के समय महिलाओं को अपने विवाह का जोड़ा पहनना चाहिए यदि विवाह का जोड़ा बन सके तो लाल रंग की साड़ी उत्तम माना जाता है ,क्योंकि लाल रंग प्रेम का प्रतीक माना जाता है करवा चौथ के अधिक से अधिक लाल रंग का प्रयोग करना चाहिए इसके अलावा गुलाबी पीला हरा रंग भी पहना जा सकता है,

कई महिलाएं दुल्हन की तरह कपड़े पहनने के साथ साथ भारी गहने भी पहनती हैं यदि यह त्यौहार विवाह का जोड़ा पहन कर मनाया जाए तो पति तथा पत्नी के बीच संबंध सदेव मधुर बने रहते हैं

करवा चौथ के व्रत के दिन पति पत्नी के बीच स्नेह का बंधन आगे बढ़ता है जहां पति अपनी पत्नी के लिए अत्यंत गर्व की अनुभूति करते हैं क्योंकि पत्नी अपने पति के लिए संपूर्ण दिवस अत्यंत कठिन व्रत रखती है अतः पति अपनी पत्नी को सम्मान तथा आदर देते हैं

पत्नी को अपने पति द्वारा रात्रि भोजन के समय चंद्रोदय के समारोह के पश्चात विशेष प्रकार का महत्वपूर्ण उपहार भी प्राप्त होता है इस दिन घर में कई प्रकार के विशेष व्यंजन तो बनते ही हैं किंतु पति अपनी पत्नी को भोजन के लिए घर से बाहर भी ले जाते हैं आज के युग में तो कई पति अपनी पत्नी के साथ साथ करवा चौथ का व्रत भी रखते हैं


करवा चौथ में जितना आवश्यक तथा पूजा पाठ करना होता है उतना ही आवश्यक कथा सुनना भी होता है देखा गया है कि कई महिलाएं कथा सुनने में रुचि नहीं लेती हैं अतः कथा में अपना ध्यान नहीं लगाती हैं अन्यथा समय के अभाव के कारण भी कई महिलाएं की कथा नहीं सुनती है किंतु ऐसा करना अत्यंत ही अनुचित होता है इसमें जितना मत व्रत कथा पूजन करने का होता है


व्रत कथा पूजन करने का होता है उतना ही महत्व करवा चौथ की कथा सुनने का भी होता है अतः प्रतीक महिलाओं को पूजा करते समय ध्यान पूर्वक व्रत की कथा अवश्य सुननी चाहिए कथा कई महिलाएं एकत्र होकर भी सुन सकती हैं साथ ही यह भी ध्यान दें कि पूजा के समय चंद्रमा दर्शन से पूर्व करवा चौथ के गीत तथा भजन कीर्तन भी गाना चाहिए करवा चौथ पर इस बात का अत्यंत महत्व होता है करवा चौथ माता के गीत तथा भजन गाने से आसपास का वातावरण शुद्ध तथा पवित्र हो जाता है तथा के पूजन का पूर्ण फल प्राप्त होता है भजन उनको आप अपने आस-पड़ोस की महिलाओं तथा अपने परिवार वालों के साथ कर सकते हैं संध्या के समय प्रिया पूजा करके चंद्रमा को अर्ध्य देकर अपने पति की पूजा करती हैं तथा उनके हाथ से पानी ग्रहण करके अपना व्रत खोलती हैं करवा चौथ के व्रत में चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व होता है सनातन हिंदू धर्म के अनुसार चंद्रमा को भगवान विष्णु जी का रूप माना जाता है तथा चंद्रमा को लंबी आयु का वरदान प्राप्त हुआ है चंद्रमा में सुंदरता प्रेम तथा लंबी आयु जैसे विशेष गुण पाए जाते हैं अधिक महिलाएं चंद्रमा को देखकर यह कामना करती हैं कि उनके पति में भी आ जाएं हिंदू धर्म में सफेद तथा काले रंग को अशुभ माना जाता है अतः करवा चौथ पर सफेद तथा काले रंग के वस्त्र पहनने का प्रयास करना चाहिए साथ ही करवा चौथ पर भूलकर भी किसी सफेद रंग के पदार्थ का दान नहीं करना चाहिए भोजन का सामान ही क्यों ना हो जैसे कि दूध दही पनीर इन प्रत्येक पदार्थों का दान देने से बचना चाहिए


4 Comments

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